तो कल रात आप फिर नही सोए ,
वही पुराने तारों को देखते रात गुजारी ,
आया वो तेरा चाँद
नही ना !
नही आएगा ।
वो भी कहीं तेरा इंतज़ार कर रहा था ,
कहीं किसी बद्री मैं छुपा
किसी झाडी मैं फंसा ,
दर्द तो उसे भी हुआ होगा
झाडी मैं काँटों का ,
डर तो उसे भी लगा होगा
बदल मैं अंधेरे का ।
क्या सोचता है
की वो दिन मैं सोया होगा ,
तेरे बिन वो अंगडाइयां ले रहा होगा ,
बदल रहा होगा वो करवटें बार बार ,
इस धुप के बाद भी कोशिश करता है तुझे देखने की ।
तू भी बड़ा जालिम है ,
रात भर तो जागेगे
और फिर ख़ुद ही गायब हो जायेगा ।
देख उसे
कितनी तपिश झेल रहा है
रात दिन तेरी ही राह देख रहा है ।
उसे देखकर लगता ही नही की चैन मिला है ।
अब तो वोह तेरी ही तरह दिखने लगा है ,
तेरे ही रंग मैं रंगने लगा है ।
तेरी हर याद है उसके ज़हन मैं
वो याद करता है ,
तेरा वो गिर गिर के संभालना ,
वोह संभल संभल के गिरना ।
वोह रूठ रूठ के बिगड़ना ,
वोह बिगड़ बिगड़ के रूठना
वो एक कहने पे सारी बातें कहना ,
वो तेरा दर्द देके उसको रुलाना ,
वो रूठना मानना ,
वो बातें बनाना ,
वो अपना बता के दूजों से मिलाना
वो तेरा बातें बदलना
वो बातें घुमाना ।
एक तू है जिसे कुछ याद ही नही सिवा उसकी याद के ,
तुझे याद है तुने किया था कुछ वादा ,
क्या था वो तेरा इरादा ,
कहा था बीत न पायेगा ये खुशनुमा मौसम ,
अब कहता है फिर आएगा वो मौसम ,
तेरी इसी वादा खिलाफी से वो परेशान है ,
फिर भी वो कहता है तू मेरी जान है ।
मैंने उससे भी बात की है
वो कहता है 'उसके सिवा कुछ समझ नही पता ,
वो तो दिल मैं रहने वालों को नही समझ पता '
कुछ और रातें बाकी हैं अब वो ना सोएगा ,
पर ये मत समझना की वो कभी रोएगा ,
दिल मैं जगह तो तेरे बना ही ली है ।
मुकाम जो पाना था वो पा ही लिया है , अब क्या फर्क पड़ता है साथ न होने का ।
नशा और खुमारी तो छा ही गई है , गम नही जाम हाथ न होने का ।
जाने क्यूँ लगता है की तुझे गम ही नही ,
पर तेरे सेहरा मैं तो आंसू मुझे दीखते कम नही ,
अब तो मैं भी आँख मिचौली से अंग आ गया हूँ ,
तेरी इन बातों पे तेरे संग आ गया हूँ ।
"कर अगर कुछ तो मिटने की आस रख ,
कहाँ मिली है किसी नदी को समंदर से बेवफाई । "