यह सफर किस डगर

on Sunday, March 1, 2009


आज मैं आपका परिचय मेरे मित्र कवि से कराने जा रहा हूँ , श्री भारत भूषण तिवारी जी ,इनका जन्म नरसिंह पुरके गाडरवारा तहसील में १२ जनवरी १९७५ को हुआ , उन्होंने अपनी स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई वहाँ से की , आजकल भोपाल में नौकरी ढूँढ रहे हैं , ह्रदय कवि हैं अलग अलग मुद्दों पर अलग अलग समय पर इनकी कवितायेंअख़बारों में लगती रहती है ,पर कम्बक्थ इनसे पेट ही नही भरता ,अब नॉर्वेगियन लेखक क्नुत हमसून के नोवेलके नायक की तरह भी हो पाना मुश्किल है जो सोच लेता है के खाऊंगा तो लिख के ही , जीवन का सघर्ष काकठिन होता जा रहा है Hunger ओर उनका यह मानना यह भी है की जीवन में कुछ करते रहना जरूरी है यहाँ उनकी एककविता लिख रहा हूँ कैसे लगी बताएं , उन्हें ओर मुझे प्रोत्साहन मिलेगा


यह सफर किस डगर

मगर , क्यूँ चला

बेखबर मन की लहर

अमृत या ज़हर

पीता चला ,

कहीं फुहार अपनेपन की

बेगाना भी कुछ लगा

खींचती है डोर कोई

खींचता बे मन कदमो का काफिला ,

सच तो है उसकी सत्ता

बस मान लेगा एक दिन ,

चला 'भारत ' उसकी ओर खींचता चला

1 comments:

shama said...

Aapki tippaneeke liye shukrguzar hun( Aaj yahantak,is blogpe).
Aapkee rachnayen padheen...khaska ye nayi rachna behtareen lagee. Mai zyada kuchh nahee keh sakti..na kavi hun, na lekhak!
Mere kuchh any blogs hain...gar samay ho to zaroor dekhen:

"Kavita"

"Kahanee"

"Lalitlekh"

"Sansmaran"

"Baagwanee"( ye keval maloomatke khatir nahee..jeevanke or dekhneka ek nazariya hai)

"Gruhsajja"( ye mera pesha hai..is blogme apnehi gharki chand tasveeren aur tips hain)

"Chindichindi"( resycling dwara kaltmakata tatha paryawaran raksha ka alp-sa yatn)

"Fiber art"( Isme apnee kalakee chand tasveeren load kar rahee hun. Bharatme akeli fiber artist hun...sirf parichayke khatir kaha...anytha na len..!
Filhaal itnaahee...anek shubhkamnayon sahit
Shama

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आपके उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद्