हाय ! वो राजदार

on Friday, January 30, 2009

इक पल लगा मुझको सपना सच हुआ होगा ,
मैंने पाया ,उसने पाया कुछ न कभी खोया होगा ।
जाने कैसे इतनी बातें दिल मैं दबाना सीखी होंगी ,
कुछ तो होंगे लोग जो राजदार कहलाते होंगे ,
और वो उससे मिले बिना कैसे रह पते होंगे ,
कहने को तो शब्द नही पर बातें भोलो भली हैं ।
सब कुछ उसको मालूम है ,पर कहती है की आधी है ।
उसकी आंखें मुझसे जाने क्या क्या तो कह जाती है ,
पर मेरी आँखें भी उसके लफ्जों के लिए रुक जाती है ।
मेरे जैसे पागल न जाने कितने और होंगे ,
जो कहते होंगे उसको की की आँखों से कुछ कहती है ।
छोटी भी है और बड़ी भी ,वो सबको प्यार जताती है
पर न जाने किसके सपनो मैं सच मैं आती है ।

2 comments:

the pink orchid said...

bahut hi khubsoorat panktiyaan hai..


kabhi fursat mein mere blog par aayein aur mujhe kuchh seekhne ka mauka de..
mere blog ka link hai
- http://merastitva.blogspot.com

अमिताभ श्रीवास्तव said...

आपका ब्लॉग ओर aap दोनों बहुत अच्छे लगे. आपकी रचना सपनो के सच खोलती हे इसे जारी रखे

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आपके उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद्